लौह नगरी किरंदुल की देवी गुंडिचा मंदिर में "हेरा पंचमी" का महापर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया ।
किरंदुल । हेरा पंचमी, रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो भगवान जगन्नाथ की पत्नी देवी लक्ष्मी के बारे में है। यह उत्सव भगवान जगन्नाथ के गुंडिचा मंदिर जाने के पांचवें दिन मनाया जाता है, जब देवी लक्ष्मी अपने पति से मिलने जाती हैं। "हेरा" शब्द का अर्थ है "देखना" और "पंचमी" का अर्थ है "पांचवां दिन", जो इस दिन के महत्व को दर्शाता है।
हेरा पंचमी का महत्व:
देवी लक्ष्मी का मिलन:
यह दिन देवी लक्ष्मी के भगवान जगन्नाथ से मिलने की लालसा और तड़प को दर्शाता है.
गुंडिचा मंदिर में उत्सव:
इस दिन, देवी लक्ष्मी गुंडिचा मंदिर जाती हैं, जहां भगवान जगन्नाथ विश्राम कर रहे होते हैं, और उनसे मिलने की कोशिश करती हैं.
नंदीघोष रथ का प्रतीकात्मक टूटना : पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन देवी लक्ष्मी नंदीघोष रथ को दो भागों में तोड़ देती हैं, जो उनके क्रोध और भगवान के प्रति प्रेम को दर्शाता है.
जगन्नाथ संस्कृति का एक अभिन्न अंग : हेरा पंचमी जगन्नाथ संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे एक अनोखे अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है.
आध्यात्मिक महत्व : यह दिन भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति का प्रतीक है और भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है.
किरंदुल के देवी गुंडिचा मंदिर में विशेष उत्सव : लोह नगरी किरंदुल के देवी गुंडिचा मंदिर में, हेरा पंचमी के दिन, देवी लक्ष्मी की एक विशेष पूजा और अनुष्ठान किया गया, और भक्त उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए .
देवी लक्ष्मी की लीला : इस अवसर पर देवी लक्ष्मी की रूठने की लीला भी दिखाई गई, जो जगन्नाथ परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
