सावन का माह भगवान शिव शक्ति को समर्पित है, नगर के सभी शिवालय और शिव मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक चलता रहा।
किरन्दुल । सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र महीना है, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है। यह महीना न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि प्राकृतिक और वैज्ञानिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है।
भगवान शिव की आराधना:
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और }.उपवास के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
समुद्र मंथन:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था, जिसमें से हलाहल विष निकला था, जिसे भगवान शिव ने ग्रहण किया था।
माता पार्वती की तपस्या:
इस महीने में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
कावड़ यात्रा:
सावन में कावड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है, जिसमें भक्त गंगाजल भरकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
प्राकृतिक महत्व:
हरियाली और वर्षा:
सावन में प्रकृति हरी-भरी हो जाती है, और वर्षा के कारण वातावरण में ताजगी आ जाती है।
जल संरक्षण:
यह महीना जल संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान नदियों, तालाबों और कुओं में पानी भर जाता है।
वैज्ञानिक महत्व:
वातावरण की शुद्धि:
बारिश के कारण धूल और प्रदूषण नीचे बैठ जाते हैं, जिससे वातावरण शुद्ध होता है।
पाचन क्रिया पर प्रभाव:
सावन में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इसलिए हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य:
हरा-भरा वातावरण मन को शांत करता है और तनाव को कम करने में मदद करता है।
सावन में क्या करें:
भगवान शिव की पूजा करें:
शिवलिंग का अभिषेक करें, बेलपत्र, फूल, और भोग चढ़ाएं।
व्रत रखें:
सोमवार का व्रत रखें और फलाहार करें।
दान करें:
क्षमता अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दक्षिणा दें।
रुद्राभिषेक कराएं:
घर में रुद्राभिषेक कराना शुभ माना जाता है।
प्रकृति की पूजा करें:
हरियाली तीज जैसे त्योहार मनाएं और प्राकृतिक तत्वों की पूजा करें।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना, प्रकृति की सुंदरता और जल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण समय है।
यह रहा सावन माह का महत्व जो भगवान शिव पार्वती को समर्पित है।
लौह नगरी किरन्दुल में भी सावन माह के आखिरी सोमवार को नगर के सभी शिवालयों और शिव मंदिरों में कावड़धारियों और शिव भक्तों का सुबह से ही तांता लगा रहा बोल बम की जयकारों के साथ कावड़ लेकर शिव भक्त मंदिर की ओर जल चढ़ाने निकल पड़े जिसमें गांधीनगर पहाड़ मे स्थित शिव मंदिर, समुद्र तल से 3000 की फीट ऊपर स्थित राम बूटी जल स्रोत गंगेश्वर धाम शिव मंदिर, धरमपुर कैंप स्थित श्री श्री बद्रीनाथ श्री श्री आदिनाथ मंदिर, मेन रोड स्थित श्री दक्षिणेश्वर शिव मंदिर, आदि शिव मंदिर व शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा इस दौरान श्री दक्षिणेश्वर शिव मंदिर में भक्तों के लिए खिचड़ी प्रसाद की भी व्यवस्था की गई थी ।
